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यूपी में सस्ती हुई बिजली: जुलाई में 4.43% कम आएगा बिजली बिल, लाखों उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा

On: June 30, 2026
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यूपी में सस्ती हुई बिजली, लाखों उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा
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लखनऊ/30 जून 2026: उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए जुलाई की शुरुआत राहत भरी खबर लेकर आई है। यूपी में सस्ती हुई बिजली का सीधा असर इस महीने के बिजली बिलों पर दिखाई देगा। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) के तहत जुलाई के लिए 4.43 प्रतिशत की राहत देने की घोषणा की है। यह कटौती पिछले करीब 15 महीनों में सबसे अधिक मानी जा रही है, जिससे प्रदेश के लाखों घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।

यूपी में सस्ती हुई बिजली, जानिए क्यों कम हुआ बिजली बिल

यूपीपीसीएल की ओर से जारी एफपीपीसीए दरें उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के निर्देशों के अनुपालन में तय की गई हैं। जुलाई माह के लिए जारी यह राहत अप्रैल 2026 की वास्तविक बिजली खरीद लागत के आधार पर दी गई है।

दरअसल, टैरिफ आदेश में बिजली खरीद की अनुमानित लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई थी, जबकि अप्रैल 2026 में बिजली की वास्तविक खरीद लागत 4.78 रुपये प्रति यूनिट रही। लागत कम रहने का सीधा लाभ अब उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है।

358.31 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी उपभोक्ताओं को

नई दरों के लागू होने से प्रदेशभर के बिजली उपभोक्ताओं को कुल 358.31 करोड़ रुपये का लाभ मिलने का अनुमान है। एफपीपीसीए के तहत 4.43 प्रतिशत की यह राहत हाल के वर्षों में सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है।

इससे पहले अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच अधिकतम 2.42 प्रतिशत तक की ही राहत उपभोक्ताओं को मिल सकी थी। ऐसे में जुलाई 2026 की यह कमी बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।

नियामक आयोग के सख्त रुख का दिखा असर

इस फैसले के पीछे उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का सख्त रुख भी अहम माना जा रहा है। आयोग ने 23 जून 2026 को अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि एफपीपीसीए की गणना केवल संबंधित माह की वास्तविक बिजली खरीद लागत के आधार पर की जाएगी। इसमें किसी अन्य अवधि की देनदारियों या अतिरिक्त खर्च को शामिल नहीं किया जाएगा।

इसी आदेश के बाद जुलाई के लिए लागत समायोजन दर तय की गई, जिसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलने जा रहा है।

अतिरिक्त वसूली का मामला अभी भी जारी

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आयोग के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि वास्तविक खरीद लागत के आधार पर ही राहत दी जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि परिषद ने पिछले 14 महीनों में एफपीपीसीए की गणना में हुई कथित त्रुटियों को लेकर लोकमहत्व प्रस्ताव दाखिल किया है। परिषद का दावा है कि उपभोक्ताओं से करीब 2000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली हुई है, जिसे वापस दिलाने के लिए कानूनी और नियामकीय स्तर पर प्रयास जारी हैं।

जुलाई में बिजली उपभोक्ताओं को राहत

बिजली की बढ़ती लागत के बीच जुलाई में 4.43 प्रतिशत की यह कटौती उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। यदि भविष्य में भी बिजली खरीद लागत नियंत्रित रहती है और नियामक आयोग इसी तरह वास्तविक लागत के आधार पर एफपीपीसीए तय करता है, तो आने वाले महीनों में भी उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिलने की संभावना बनी रह सकती है।

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