नई दिल्ली/17 अक्टूबर 2026: केंद्र सरकार ने जनगणना की तैयारियों के बीच नियमों में अहम बदलाव किया है। अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के साथ सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी जनगणना कार्य में प्रगणक (एन्यूमेरेटर) नियुक्त करने की अनुमति होगी। सरकार का यह कदम जनगणना के लिए उपलब्ध कर्मचारियों का दायरा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह संशोधन ऐसे समय में हुआ है, जब निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में लगाने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है।
जनगणना 2027 के लिए बदले गए नियम, निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी मिलेगी जिम्मेदारी
केंद्र सरकार ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को जनगणना नियम, 1990 में संशोधन किया। भारत के महापंजीयक (आरजीआई) मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, अब निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी प्रगणक के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा।
संशोधित नियमों के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को जनगणना कार्य के लिए कर्मचारियों और अन्य उपयुक्त व्यक्तियों की सेवाएं लेने का अधिकार दिया गया है। इसमें सरकारी संस्थानों के साथ सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं।
इस फैसले से जनगणना के दौरान कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किस राज्य में कितने शिक्षकों की तैनाती होगी और इसके लिए क्या व्यवस्था अपनाई जाएगी, यह संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगा।
किन लोगों को बनाया जा सकेगा जनगणना प्रगणक?
राजपत्र अधिसूचना में जनगणना अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जा सकने वाले व्यक्तियों की श्रेणियों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षक: केंद्र, राज्य, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त निजी संस्थानों, सोसायटी और न्यासों से संचालित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक।
- लिपिक और अधिकारी: केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकायों या विभिन्न प्रतिष्ठानों में कार्यरत लिपिक और अधिकारी।
- अन्य उपयुक्त व्यक्ति: राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन जिसे जनगणना कार्य के लिए उपयुक्त समझे, उसे भी नियुक्त किया जा सकता है।
इन प्रावधानों के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, वैधानिक निकायों, बैंकों, कंपनियों, संस्थानों, सोसायटी और न्यासों से जुड़े कर्मचारियों को भी निर्धारित श्रेणियों के अनुसार जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है।
निजी स्कूलों के शिक्षकों की तैनाती का मामला हाई कोर्ट पहुंचा
नियमों में यह संशोधन पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दायर एक याचिका की पृष्ठभूमि में भी महत्वपूर्ण है। हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस ने गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में लगाने के फैसले को चुनौती दी थी।
याचिका के अनुसार, हरियाणा सरकार ने निजी स्कूलों से जनगणना कार्य के लिए उपलब्ध शिक्षकों का ब्योरा मांगा था। इस संबंध में जारी दो सरकारी पत्रों को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने शिक्षकों की सेवाएं लेने के वैधानिक आधार पर सवाल उठाए।
आठ अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने हरियाणा सरकार के उन दोनों पत्रों पर रोक लगा दी थी। इस मामले में अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2027 को निर्धारित है।
याचिका में क्या दलील दी गई थी?
याचिकाकर्ता की प्रमुख दलील थी कि जनगणना अधिनियम, 1948 और उसके तहत बनाए गए नियमों में गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को प्रगणक या पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने के लिए सेवाएं लेने का स्पष्ट वैधानिक अधिकार नहीं दिया गया है।
याचिका में जनगणना अधिनियम की धारा 4ए का भी उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता के मुताबिक, इस धारा में जनगणना संबंधी कार्यों के लिए स्थानीय निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं लेने का विशेष प्रावधान है। निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल और उनके कर्मचारी स्थानीय निकायों की श्रेणी में नहीं आते।
इसी आधार पर निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में लगाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई थी। अब केंद्र सरकार द्वारा नियमों में किए गए संशोधन के बाद इस विषय पर कानूनी स्थिति और अदालत में चल रही कार्यवाही पर नजर रहेगी। संशोधन का प्रभाव लंबित मामले पर किस तरह पड़ेगा, यह संबंधित कानूनी प्रावधानों और अदालत के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगा।
2027 में होगी देश की आठवीं जनगणना
भारत में वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी।
पहले चरण में गृह सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना होगी। इन दोनों चरणों के जरिए देश की आबादी और उससे संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे।
भारत में जनगणना सामान्य तौर पर प्रत्येक दस वर्ष में आयोजित की जाती है। वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना को कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित करना पड़ा था। अब 2027 की जनगणना की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार का ताजा संशोधन कर्मचारियों की उपलब्धता और उनकी नियुक्ति से जुड़े नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
कुल मिलाकर, जनगणना नियम, 1990 में किए गए इस संशोधन से निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी जनगणना कार्य में शामिल करने का रास्ता खुला है। हालांकि, हरियाणा में इससे जुड़ा मामला अदालत में लंबित है। ऐसे में नियमों में बदलाव के साथ-साथ न्यायिक कार्यवाही भी इस मुद्दे की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।








