नई दिल्ली/24 अक्टूबर 2026। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में भारतीय नौसेना एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने जा रही है। नौसेना 3 से 5 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली में हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (Indo-Pacific Regional Dialogue—IPRD 2026) की मेजबानी करेगी। इस तीन दिवसीय आयोजन में 18 देशों के समुद्री विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति निर्माता और अन्य पेशेवर हिस्सा लेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सम्मेलन के पहले दिन संबोधित करेंगे।
इस वर्ष संवाद का मुख्य विषय ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग’ रखा गया है। सम्मेलन में समुद्री विज्ञान, महासागरों के प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।
IPRD 2026: समुद्री सहयोग और तकनीकी साझेदारी पर रहेगा जोर
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, IPRD 2026 का उद्देश्य केवल विभिन्न देशों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशना भी है। सम्मेलन में राष्ट्रीय, उप-क्षेत्रीय और व्यापक क्षेत्रीय स्तर पर ऐसे उपायों की पहचान करने पर जोर दिया जाएगा, जिन्हें मौजूदा द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग व्यवस्थाओं के माध्यम से लागू किया जा सके।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और सामरिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में समुद्र से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग, अनुसंधान में साझेदारी और नई तकनीकों का जिम्मेदार विकास विभिन्न देशों के लिए अहम विषय बन गए हैं।
18 देशों के विशेषज्ञ करेंगे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा
तीन दिवसीय सम्मेलन में 18 देशों के विशेषज्ञ अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में समुद्री विज्ञान, महासागर प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता, शैक्षणिक नेटवर्क और उभरती प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, तटीय क्षेत्रों और समुद्री संसाधनों के सामने पैदा होने वाली चुनौतियों को देखते हुए वैज्ञानिक सहयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। सम्मेलन में इस बात पर विचार किया जाएगा कि अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं को साझा करके इन चुनौतियों से निपटने के प्रयासों को कैसे प्रभावी बनाया जा सकता है।
संयुक्त अनुसंधान और जिम्मेदार तकनीकी विकास पर विचार
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, संवाद में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने, सहयोग के जरिए प्रौद्योगिकी विकसित करने, जिम्मेदार शासन व्यवस्था को मजबूत करने और वैज्ञानिक आंकड़ों तक उचित पहुंच सुनिश्चित करने के व्यावहारिक तरीकों पर भी चर्चा होगी।
इसके साथ ही संस्थागत साझेदारी को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि सम्मेलन में सामने आने वाले विचारों को भविष्य में सहयोग की ठोस पहलों में बदला जा सके। द्विपक्षीय और बहुपक्षीय तंत्रों के माध्यम से साझा प्राथमिकताओं पर काम करना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
हिंद-प्रशांत महासागर पहल से भी जुड़ा है संवाद
IPRD के पिछले संस्करणों में हिंद-प्रशांत महासागर पहल (Indo-Pacific Oceans Initiative—IPOI) के सात परस्पर जुड़े समुद्री प्राथमिकता क्षेत्रों के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2019 में बैंकॉक में आयोजित 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान इस पहल की घोषणा की थी।
IPOI का व्यापक उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न देशों के बीच समन्वय मजबूत करना है। इसी व्यापक संदर्भ में IPRD 2026 विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को मिलेगा नया मंच
नई दिल्ली में आयोजित होने वाला IPRD 2026 समुद्री विषयों पर विशेषज्ञों के बीच विचारों के आदान-प्रदान और सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने का मंच बनेगा। सम्मेलन का वास्तविक महत्व इस बात से तय होगा कि इसमें सामने आने वाले सुझावों को साझा अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और संस्थागत साझेदारी के रूप में किस हद तक आगे बढ़ाया जाता है।






