लखनऊ/22 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और तकनीक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता का सम्मान करना और बुढ़ापे में उनकी सेवा करना बच्चों का कर्तव्य है। माता-पिता अपने बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए जीवनभर मेहनत करते हैं, इसलिए बच्चों को भी जरूरत के समय उनका सहारा बनना चाहिए।
गुरुवार को महर्षि यूनिवर्सिटी, लखनऊ के सातवें दीक्षोत्सव को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर जरूरत से ज्यादा निर्भर न रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग करते समय अपनी बुद्धिमत्ता, विवेक और रचनात्मकता को भी महत्व देना जरूरी है। इस दौरान उन्होंने शोध, नवाचार, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और वंचित बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
आनंदीबेन पटेल का संदेश: माता-पिता की सेवा करना न भूलें विद्यार्थी
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बहुत कुछ त्याग करते हैं। वे उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतों को पूरा करने में अपनी पूरी क्षमता लगा देते हैं। इसके बावजूद कुछ बुजुर्गों को जीवन के अंतिम पड़ाव में आश्रमों में रहना पड़ता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने माता-पिता के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव बनाए रखें। उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना या रोजगार प्राप्त करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति में अच्छे संस्कार और सामाजिक दायित्वों की समझ विकसित करना भी है।
राज्यपाल ने दीक्षोत्सव में उपाधि और पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, मेहनत करने और अपने ज्ञान तथा कौशल को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया।
AI का इस्तेमाल करें, लेकिन अपनी बुद्धिमत्ता पर भी भरोसा रखें
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच राज्यपाल ने विद्यार्थियों को तकनीक के संतुलित उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल करते समय अपनी सोच, विवेक और रचनात्मकता को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए।
आज शिक्षा के क्षेत्र में AI की मदद से जानकारी जुटाना, विषयों को समझना और नए विचारों पर काम करना आसान हुआ है। लेकिन तकनीक से प्राप्त जानकारी को समझना, उसकी सत्यता जांचना और सही निर्णय लेना विद्यार्थी की अपनी जिम्मेदारी है।
आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से यह संकल्प लेने को कहा कि वे अपने ज्ञान का उपयोग किसी को भ्रमित करने के बजाय समाज और देश के हित में करेंगे। उन्होंने सकारात्मक सोच के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए काम करने को सच्ची शिक्षा का उद्देश्य बताया।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम
राज्यपाल ने कहा कि भारत विकास के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है और दुनिया की नजर देश की प्रगति पर है। इस विकास यात्रा में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा और कौशल को पहचानने तथा उनका उपयोग राष्ट्रहित में करने की अपील की। उनके मुताबिक, सामूहिक प्रयास, सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति के जरिए देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहने, बल्कि अपने ज्ञान का लाभ समाज के दूसरे वर्गों तक पहुंचाने के लिए भी प्रेरित किया।
वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए महर्षि यूनिवर्सिटी की पहल
दीक्षोत्सव के दौरान राज्यपाल ने महर्षि यूनिवर्सिटी की ओर से जन भवन स्थित आदर्श माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए 400 टी-शर्ट उपलब्ध कराने पर आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि इस विद्यालय में वंचित परिवारों के बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी दिए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीतने वाले बच्चों को उपहार के रूप में शर्ट दी जाती है।
राज्यपाल ने कहा कि वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा और प्रोत्साहन के बेहतर अवसर मिलने चाहिए। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने युवाओं से भी ऐसे बच्चों की शिक्षा और उनके विकास में योगदान देने की अपील की।
उनके संदेश का सार यही रहा कि समाज की प्रगति तभी व्यापक होगी, जब विकास के अवसर उन लोगों तक भी पहुंचेंगे जिन्हें आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है।
यूपी के 19 राज्य विश्वविद्यालयों को NAAC में A+ और A++ ग्रेड
आनंदीबेन पटेल ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता का उल्लेख करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के 19 राज्य विश्वविद्यालयों ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) के मूल्यांकन में A+ और A++ ग्रेड हासिल किए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग और राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। विश्वविद्यालयों में शोध और अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं।
राज्यपाल ने उच्च शिक्षा संस्थानों से शोध की गुणवत्ता सुधारने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और शिक्षा को अधिक प्रभावी तथा रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाला शोध केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका लाभ समाज और देश को भी मिलना चाहिए।
किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर शोध और नवाचार पर दें ध्यान
राज्यपाल ने महर्षि यूनिवर्सिटी में संचालित शैक्षणिक, रचनात्मक और नवाचार संबंधी गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी और सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें व्यावहारिक प्रयोगों, शोध और नए विचारों पर भी काम करना चाहिए।
उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को ऐसे अवसर दें, जिनसे उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता और रचनात्मक सोच विकसित हो सके। शोध को समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना भी जरूरी है।
महर्षि यूनिवर्सिटी के सातवें दीक्षोत्सव में राज्यपाल का संदेश शिक्षा, संस्कार और तकनीक के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित रहा। विद्यार्थियों के लिए उनका संदेश स्पष्ट था—ज्ञान अर्जित करें, नई तकनीक अपनाएं, लेकिन अपनी सोच और मानवीय मूल्यों को महत्व देना न भूलें।








