नई दिल्ली/22 अक्टूबर 2026। दिल्ली में यमुना नदी की सफाई और पुनरुद्धार से जुड़ी परियोजनाओं के बहाने सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को श्याम विहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए दावा किया कि अगले 30 साल तक विपक्ष की सरकार बनने वाली नहीं है। उन्होंने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर भी कटाक्ष किया और कहा कि भीड़ जुटाने या धरना देने से जनादेश को नहीं बदला जा सकता, इसके लिए काम करना जरूरी है।
यमुना पुनरुद्धार से जुड़ी 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के मौके पर शाह ने दिल्ली की पूर्ववर्ती सरकारों को भी घेरा। उनके भाषण में नदी की सफाई के साथ पंजाब में नशे की समस्या, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी राजनीति जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठे।
अमित शाह का बयान: विपक्ष पर साधा निशाना
अमित शाह ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और उनके आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी को जनता के समर्थन से जनादेश मिलता है और विपक्ष चुनावी हार के बाद अलग-अलग बहाने बनाता है। दिल्ली में SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के संदर्भ में उन्होंने वोट चोरी के दावों पर भी निशाना साधा।
शाह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मतदाता सूची और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने का रवैया राजनीतिक सुविधा के हिसाब से नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, जब चुनावी नतीजे किसी दल के पक्ष में आते हैं, तब वही व्यवस्था स्वीकार्य हो जाती है, लेकिन विपरीत नतीजों पर सवाल उठाए जाते हैं।
‘अगले 30 साल तक नहीं बनेगी विपक्ष की सरकार’
अपने भाषण में अमित शाह ने विपक्ष को लेकर लंबा राजनीतिक दावा किया। उन्होंने गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और असम में बीजेपी या उसके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष को लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहना पड़ सकता है।
शाह ने कहा कि बीजेपी अगले 30 साल तक सत्ता में रहने वाली है और विपक्ष की सरकार बनने की संभावना नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर विदेश दौरों को लेकर भी तंज कसा। उनके इन बयानों को आगामी चुनावों के मद्देनजर विपक्ष के खिलाफ बीजेपी के आक्रामक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा सकता है।
यमुना पुनरुद्धार परियोजनाओं पर क्या बोले अमित शाह?
दिल्ली के श्याम विहार में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य केंद्र यमुना नदी के पुनरुद्धार से जुड़ी 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाएं रहीं। अमित शाह ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की सरकारों ने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद यमुना की सफाई के लिए पर्याप्त काम नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यमुना को साफ करने का अवसर अब बीजेपी को मिला है। साथ ही विपक्ष को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन से समस्याओं का समाधान नहीं होता, बल्कि जनता के लिए ठोस काम करना जरूरी है।
यमुना की सफाई दिल्ली के लिए केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चुनौती भी है। नदी में प्रदूषण कम करने के लिए सीवेज शोधन, गंदे नालों के प्रवाह पर नियंत्रण और प्रदूषणकारी अपशिष्ट के प्रबंधन जैसे कदमों का प्रभावी क्रियान्वयन अहम रहेगा। ऐसे में परियोजनाओं की घोषणा के साथ उनके समयबद्ध क्रियान्वयन और वास्तविक नतीजों पर भी नजर रहेगी।
पंजाब में नशे के मुद्दे पर AAP को घेरा
अमित शाह ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर भी आम आदमी पार्टी की सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे का कारोबार बढ़ा है और बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए वहां सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। शाह ने दावा किया कि 2029 तक पंजाब से नशे की समस्या खत्म करने के लिए काम किया जाएगा।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से बिहार, गुजरात, राजस्थान और गोवा में नशे की समस्या को लेकर गृह मंत्री से पूछे गए सवालों का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि उनके पास जवाब हैं, लेकिन पहले पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार को सत्ता से हटाया जाएगा।
इस बयान से साफ है कि यमुना पुनरुद्धार के कार्यक्रम में दिल्ली के स्थानीय मुद्दों के साथ पंजाब की राजनीति भी केंद्र में रही। नशे के खिलाफ कार्रवाई और नदी की सफाई, दोनों ही विषयों पर जनता की अपेक्षा घोषणाओं से आगे बढ़कर ठोस परिणाम देखने की है।
अब परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
अमित शाह के भाषण ने यमुना पुनरुद्धार के कार्यक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया। एक ओर बीजेपी ने नदी की सफाई को अपनी प्राथमिकता बताते हुए पिछली सरकारों पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के चुनावी आरोपों और विरोध प्रदर्शनों पर हमला किया।
हालांकि, यमुना की स्थिति में वास्तविक सुधार का आकलन परियोजनाओं के बजट या राजनीतिक दावों से ही नहीं होगा। नदी में प्रदूषण का स्तर कितना घटता है, सीवेज का शोधन कितना प्रभावी रहता है और निर्धारित समय में काम कितना पूरा होता है—इन पहलुओं से ही इन योजनाओं की सफलता तय होगी। दिल्ली के लोगों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि यमुना को साफ करने की घोषणाएं जमीन पर कितनी असरदार साबित होती हैं।






