लखनऊ/24 अक्टूबर 2026। टीवी सीरियल CID में आपने अक्सर देखा होगा कि घटनास्थल पर मिला एक बाल, फिंगरप्रिंट या छोटा-सा सुराग भी अपराधी तक पहुंचने का रास्ता खोल देता है। अब उत्तर प्रदेश में आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान और तकनीक की मदद से जांच की ऐसी ही संभावनाएं वास्तविक जीवन में सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ में इसी बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में अपराध की जांच को वैज्ञानिक आधार देने और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक और आधुनिक डिजिटल तकनीकों के दौर में अपराधी भले ही तकनीक का सहारा लें, लेकिन वैज्ञानिक जांच और विधिक प्रक्रियाओं के जरिए उन तक पहुंचने की क्षमता विकसित करना जरूरी है।
फॉरेंसिक विज्ञान से अपराधियों तक पहुंचेगी पुलिस, CID की रील लाइफ का दिया उदाहरण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फॉरेंसिक विज्ञान की उपयोगिता समझाने के लिए लोकप्रिय टीवी सीरियल CID का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले लोग टेलीविजन पर देखते थे कि एक बाल या फिंगरप्रिंट के आधार पर जांचकर्ता अपराधी तक कैसे पहुंचते हैं। अब वैज्ञानिक साक्ष्यों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से ऐसी जांच वास्तविक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मुख्यमंत्री के संबोधन का प्रमुख संदेश था कि अपराध की जांच केवल संदेह या बयानों पर निर्भर नहीं रहनी चाहिए। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, डीएनए विश्लेषण, डिजिटल रिकॉर्ड और वैज्ञानिक परीक्षण जांच को अधिक मजबूत आधार दे सकते हैं।
आज जब अपराध के तौर-तरीके बदल रहे हैं, तब पुलिस के लिए भी जांच की आधुनिक विधियों को अपनाना जरूरी हो गया है। खासकर साइबर अपराध और डिजिटल माध्यमों से जुड़े मामलों में तकनीकी दक्षता की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
42 साल बाद मिली सजा का किया जिक्र
न्याय मिलने में देरी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने एक माफिया से जुड़े मामले का उदाहरण दिया। उनके अनुसार, संबंधित व्यक्ति ने वर्ष 1980 में पहला अपराध किया था, लेकिन साक्ष्यों के अभाव और डीएनए सैंपल नष्ट होने के कारण उसे वर्ष 2022 में सजा मिल सकी। इस तरह मामले में न्याय मिलने में 42 साल का अंतर रहा।
इस उदाहरण के जरिए मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और जांच के दौरान आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। किसी आपराधिक मामले में साक्ष्य जितने व्यवस्थित और विश्वसनीय होंगे, अदालत के सामने तथ्यों को प्रस्तुत करना उतना ही प्रभावी हो सकता है।
AI मददगार बने, इंसानी विवेक की जगह न ले: योगी
मुख्यमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि एआई मददगार तकनीक हो सकती है, लेकिन उसे निर्णय लेने में अंतिम प्राधिकारी नहीं बनना चाहिए। तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए, न कि मनुष्य पूरी तरह तकनीक के निर्णयों पर निर्भर हो जाए।
एआई और डीपफेक जैसी तकनीकों का इस्तेमाल जहां कई क्षेत्रों में सुविधाएं बढ़ा रहा है, वहीं इनके दुरुपयोग से फर्जी सामग्री तैयार करने और डिजिटल पहचान को लेकर नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं। ऐसे में वैज्ञानिक जांच, तकनीकी विशेषज्ञता और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने फॉरेंसिक जांच और आधुनिक तकनीक के समन्वय को अपराध अनुसंधान में तेजी लाने तथा न्याय मिलने में होने वाली अनावश्यक देरी कम करने की दिशा में अहम बताया।
टेक संगम 2026 में कई नई पहलों का शुभारंभ
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने फॉरेंसिक विज्ञान, तकनीक और कानूनी अनुपालन से संबंधित कई पहलों का शुभारंभ किया। उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक्स और विधिक अनुपालन के क्षेत्र में काम करने वाले लेक्सक्यू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया।
इसके साथ ही कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च किया गया, ‘अभेद्य’ परियोजना की आधारशिला रखी गई और ‘AI in Construction’ पुस्तक का विमोचन किया गया।
इन पहलों का व्यापक संदर्भ उभरती तकनीकों के इस्तेमाल, डिजिटल प्रक्रियाओं और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने से जुड़ा है। हालांकि, इनके वास्तविक प्रभाव का आकलन इनके कार्यान्वयन और उपलब्ध परिणामों के आधार पर किया जा सकेगा।
भू-माफिया से मुक्त जमीन पर बना फॉरेंसिक संस्थान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए लखनऊ स्थित फॉरेंसिक संस्थान की जमीन का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि करीब 100 एकड़ जमीन पर कभी एक बड़े भू-माफिया का कब्जा था।
मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2017 में पुलिस अधिकारियों से जानकारी मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई और संबंधित भू-माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। दूसरी एफआईआर दर्ज होने के बाद उसने आत्मसमर्पण कर जमीन छोड़ दी।
इस उदाहरण के जरिए मुख्यमंत्री ने कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और सरकारी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की कार्रवाई का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, वहां आज आधुनिक फॉरेंसिक संस्थान विकसित किया गया है।
सात साल से अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्यों पर जोर
मुख्यमंत्री ने नए आपराधिक कानूनों के तहत गंभीर अपराधों की जांच में फॉरेंसिक साक्ष्यों के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक लैब विकसित की जा रही हैं।
उनके अनुसार, इनमें से 12 प्रयोगशालाएं तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य अंतिम चरण में हैं। इसके अलावा 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन तैनात की गई हैं, जिनका उद्देश्य घटनास्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने में सहायता करना है।
इन संसाधनों से जांच अधिकारियों को घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र करने और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से जांच के लिए भेजने में मदद मिल सकती है। इससे विवेचना की गुणवत्ता बेहतर बनाने और अदालत में साक्ष्यों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में सहायता मिलने की उम्मीद है।
2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता का लक्ष्य
सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की तकनीकी विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने डेटा को 21वीं सदी की महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी संपत्ति बताते हुए कहा कि प्रदेश को एआई और डेटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है। इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया गया।
मुख्यमंत्री ने नोएडा में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट स्थापित किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और एआई जैसे क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश की तकनीकी क्षमता बढ़ सकती है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
पांच हजार से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है UPSIFS
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने UPSIFS की स्थापना और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 1 अगस्त 2021 को संस्थान की आधारशिला रखी थी।
संस्थान में डीएनए, साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक्स से जुड़ी आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित की गई हैं। इसके अलावा एआई, रोबोटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों के इस्तेमाल से अपराध अनुसंधान को मजबूत बनाने पर काम किया जा रहा है।
डॉ. गोस्वामी के अनुसार, संस्थान अब तक पुलिस, रक्षा बलों और प्रशासन से जुड़े पांच हजार से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने भी सम्मेलन में साइबर बुलिंग और डिजिटल एविडेंस जैसे विषयों पर चल रही चर्चाओं का उल्लेख किया।
नौ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ हुआ समझौता
टेक संगम 2026 के दौरान शिक्षा, तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इनमें यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस (अमेरिका), जीवाजी यूनिवर्सिटी (ग्वालियर), सैन्स इंस्टीट्यूट (अमेरिका), उत्तर प्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, डायरेक्टरेट ऑफ फॉरेंसिक साइंस सर्विसेज, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) शामिल हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस की प्रेसिडेंट प्रो. तनुजा सिंह ने उत्तर प्रदेश में एआई और साइबर तकनीक के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इन क्षेत्रों में राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी नेतृत्व करने की क्षमता विकसित हो सकती है। उन्होंने छात्रों को देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण बताया।
वैज्ञानिक जांच से न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश
टेक संगम 2026 में फॉरेंसिक विज्ञान, एआई, साइबर सुरक्षा और डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा ने अपराध अनुसंधान में तकनीक की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। वैज्ञानिक संसाधनों का विस्तार, पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘रील लाइफ से रियल लाइफ’ वाला उदाहरण इसी बदलाव को सामने रखता है। अब चुनौती यह है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल विश्वसनीय साक्ष्य जुटाने, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और अदालतों में निष्पक्ष व प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के लिए लगातार किया जाए।








