नई दिल्ली/23 अक्टूबर 2026: दिल्ली में दिवाली से पहले पटाखों को लेकर असमंजस बना हुआ है। एक तरफ राजधानी की हवा की गुणवत्ता लगातार चिंता बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर लोग यह जानना चाहते हैं कि इस साल दिवाली पर ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति मिलेगी या पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध जारी रहेगा। दशहरे के बाद दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने और ग्रैप-1 की पाबंदियां लागू होने के बीच अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
दिल्ली सरकार की ओर से पटाखों पर सालभर प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी के बीच पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल को सीमित शर्तों के साथ अनुमति दी थी। ऐसे में इस बार भी लोग राहत की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, दिवाली 2026 पर पटाखे जलाने को लेकर अंतिम स्थिति अदालत के आदेश और लागू सरकारी निर्देशों से ही स्पष्ट होगी।
दिल्ली में दिवाली पर पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट क्या कह सकता है?
पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की पिछली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान अदालत ने ऐसी व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया था, जिसमें लोगों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखने के साथ प्रदूषण से होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सके।
इस मुद्दे पर दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के बीच अलग-अलग राय है। कुछ लोग सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति देने के पक्ष में हैं, जबकि प्रदूषण को लेकर चिंतित लोग पूरी तरह प्रतिबंध जारी रखने की मांग करते हैं।
ऑल द्वारका रेजिडेंट फेडरेशन के अजीत स्वामी के मुताबिक, आतिशबाजी के लिए समय निर्धारित किया जाना चाहिए और केवल ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति मिलनी चाहिए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाने के लिए क्या निर्देश देती है।
GRAP-1 लागू, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ी प्रदूषण की चिंता
दशहरे के बाद दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी में लगातार दूसरे दिन वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की गई। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण की पाबंदियां लागू की गई हैं।
GRAP के तहत वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग स्तरों पर कदम उठाए जाते हैं। इनमें धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।
दिवाली के नजदीक आने के साथ पटाखों का मुद्दा भी अहम हो गया है। यदि हवा की गुणवत्ता खराब बनी रहती है, तो आतिशबाजी से जुड़े प्रतिबंधों और संभावित छूट पर बहस और तेज हो सकती है।
हालांकि, केवल GRAP-1 लागू होने से पटाखों को लेकर अदालत या सरकार के अलग आदेश अपने आप समाप्त नहीं हो जाते। पटाखों के इस्तेमाल के लिए लागू विशिष्ट निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।
क्या ग्रीन पटाखे प्रदूषण से पूरी तरह सुरक्षित हैं?
ग्रीन पटाखों को अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से विकसित किया जाता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होते हैं। इनके इस्तेमाल से भी धुआं, कण और शोर पैदा हो सकते हैं।
दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में पहले से खराब वायु गुणवत्ता के दौरान अतिरिक्त उत्सर्जन स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को बढ़ा सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से प्रभावित लोगों के लिए प्रदूषित हवा विशेष रूप से परेशानी का कारण बन सकती है।
इसी वजह से ग्रीन पटाखों को लेकर किसी भी तरह की छूट लागू होने पर उसके साथ निर्धारित समय, प्रमाणन और अन्य शर्तों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा। किसी उत्पाद को केवल ग्रीन पटाखा बताकर इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है; उसकी वैधता और लागू नियमों की पुष्टि भी जरूरी है।
क्या GRAP की पाबंदियों से दिल्ली की हवा सुधर रही है?
प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर 2022 से फरवरी 2026 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। यह विश्लेषण India Quality and Energy Insights में प्रकाशित हुआ और इसे विश्लेषक मनोज कुमार ने तैयार किया।
रिपोर्ट में सर्दियों के दौरान दिल्ली के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़े इस प्रकार बताए गए हैं:
| सर्दियों का मौसम | औसत AQI |
|---|---|
| 2022-23 | 280 |
| 2023-24 | 304 |
| 2024-25 | 285 |
| 2025-26 | 295 |
इन आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में औसत AQI बढ़कर 304 हो गया था। इसके बाद 2024-25 में इसमें गिरावट आई, लेकिन 2025-26 में यह फिर बढ़कर 295 तक पहुंच गया।
विश्लेषण में यह भी बताया गया कि जब GRAP का तीसरा या चौथा चरण लागू किया गया, तो 12 में से 10 मामलों में अगले सात दिनों के भीतर औसत AQI और बढ़ गया।
इस निष्कर्ष की व्याख्या करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि पाबंदियां लागू होने के बाद प्रदूषण बढ़ना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उपाय पूरी तरह बेअसर हैं। हवा की दिशा, मौसम, तापमान, स्थानीय उत्सर्जन और क्षेत्रीय प्रदूषण सहित कई कारक AQI को प्रभावित करते हैं। ऐसे में GRAP के असर का आकलन करने के लिए इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
दिवाली 2026 पर पटाखे जलाने से पहले क्या करें?
दिल्ली में रहने वाले लोगों को दिवाली पर आतिशबाजी करने से पहले लागू प्रतिबंधों और आधिकारिक आदेशों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम आदेश और दिल्ली सरकार की अधिसूचनाएं जांचें।
- ग्रीन पटाखों की अनुमति मानकर न चलें; पहले यह सुनिश्चित करें कि इस्तेमाल की अनुमति है या नहीं।
- यदि सीमित छूट दी जाती है, तो निर्धारित समय और अन्य शर्तों का पालन करें।
- प्रदूषण और शोर से बच्चों, बुजुर्गों तथा संवेदनशील लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखें।
दिल्ली में पटाखों पर अंतिम फैसला कब होगा?
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि दिवाली 2026 पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा या ग्रीन पटाखों के लिए सीमित छूट मिलेगी। इसका उत्तर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और संबंधित प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों से स्पष्ट होगा।
दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर लोगों की धार्मिक भावनाएं और परंपराएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन राजधानी में प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए किसी भी निर्णय में नियमों की स्पष्टता और उनका प्रभावी पालन अहम रहेगा।
नोट: यह खबर उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। 23 अक्टूबर 2026 तक दिवाली पर पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश की स्वतंत्र पुष्टि यहां नहीं की गई है। पाठकों को पटाखों के इस्तेमाल से पहले अदालत और संबंधित सरकारी विभागों के नवीनतम आधिकारिक निर्देश देखने चाहिए।






