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CISF का ऐतिहासिक पुनर्गठन 1 नवंबर से, बिजली से लेकर मेट्रो और बंदरगाहों तक की सुरक्षा होगी मजबूत

On: October 18, 2026
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CISF का ऐतिहासिक पुनर्गठन 1 नवंबर से
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नई दिल्ली/18 अक्टूबर 2026: देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) बड़ा बदलाव करने जा रहा है। बल 1 नवंबर 2026 से अपने प्रशासनिक और परिचालन ढांचे का व्यापक पुनर्गठन लागू करेगा। इस बदलाव के तहत अलग-अलग उद्योगों और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से क्षेत्रीय सेक्टरों को नए सिरे से व्यवस्थित किया जाएगा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा प्रबंधन में विशेषज्ञता बढ़ाना, निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और संबंधित मंत्रालयों तथा प्रतिष्ठानों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करना है। गृह मंत्रालय (MHA) ने इस पुनर्गठन को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत बिजली, कोयला, इस्पात, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और बंदरगाहों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

CISF का पुनर्गठन: किन क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था में होगा बदलाव?

CISF देश के कई महत्वपूर्ण औद्योगिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है। प्रस्तावित पुनर्गठन में मौजूदा क्षेत्रीय सेक्टरों को उद्योग-विशेष की जरूरतों के अनुरूप ढालने की योजना है। इससे संबंधित क्षेत्रों की चुनौतियों को समझने और सुरक्षा संबंधी निर्णयों को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिल सकती है।

इस बदलाव के दायरे में प्रमुख रूप से ये क्षेत्र शामिल हैं:

  • बिजली उत्पादन और बिजली से जुड़े प्रतिष्ठान
  • कोयला उद्योग
  • इस्पात उद्योग
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस
  • बंदरगाह
  • सरकारी भवन
  • संग्रहालय और ऐतिहासिक स्मारक
  • मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS), जिसमें मेट्रो जैसी परिवहन प्रणालियां शामिल हैं

दिल्ली में सरकारी भवनों, संग्रहालयों और मेट्रो सुरक्षा के लिए नया सेक्टर

पुनर्गठन के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सेक्टर को नए स्वरूप में व्यवस्थित किया जाएगा। CISF के अनुसार, इसे ‘गवर्नमेंट बिल्डिंग्स, म्यूजियम्स एंड मॉन्यूमेंट्स एंड मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (GBMM & MRTS) सेक्टर, नई दिल्ली’ नाम दिया जाएगा।

इस व्यवस्था में सरकारी भवनों, संग्रहालयों, स्मारकों और बड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क की सुरक्षा से संबंधित जिम्मेदारियों को एक विशेष परिचालन ढांचे के अंतर्गत व्यवस्थित किया जाएगा। दिल्ली जैसे महानगर में, जहां महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक परिवहन का व्यापक नेटवर्क है, इस तरह के विशेषीकृत प्रबंधन की अहम भूमिका हो सकती है।

बिजली, कोयला और इस्पात सेक्टर में क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था के तहत कई मौजूदा सेक्टरों का पुनर्गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य संबंधित उद्योगों की सुरक्षा जरूरतों पर अधिक केंद्रित निगरानी सुनिश्चित करना है।

प्रस्तावित बदलाव इस प्रकार हैं:

  • पावर-I सेक्टर: नई दिल्ली के नॉर्थ सेक्टर को पावर-I सेक्टर के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा।
  • पावर-II सेक्टर: कोलकाता के नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर-II को पावर-II सेक्टर बनाया जाएगा।
  • कोल सेक्टर: रांची के ईस्टर्न सेक्टर को कोयला उद्योग की सुरक्षा से संबंधित सेक्टर के रूप में व्यवस्थित किया जाएगा।
  • स्टील सेक्टर: भिलाई के सेंट्रल सेक्टर को स्टील सेक्टर में बदला जाएगा।
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सेक्टर: गुवाहाटी के नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर को इस नए स्वरूप में पुनर्गठित किया जाएगा।

इन बदलावों से संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा जरूरतों के अनुसार जिम्मेदारियों का निर्धारण और परिचालन निगरानी अधिक व्यवस्थित बनाने का लक्ष्य है।

मुंबई और चेन्नई के बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए अलग व्यवस्था

बंदरगाह देश के व्यापार, माल ढुलाई और रणनीतिक संपर्क व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए CISF के मुंबई स्थित वेस्टर्न सेक्टर और चेन्नई स्थित साउथ सेक्टर का भी पुनर्गठन किया जाएगा।

इसके तहत मुंबई के वेस्टर्न सेक्टर को वेस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर और चेन्नई के साउथ सेक्टर को ईस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर के रूप में व्यवस्थित किया जाएगा।

इस बदलाव का उद्देश्य दोनों तटीय क्षेत्रों में बंदरगाहों से संबंधित सुरक्षा जरूरतों पर विशेष ध्यान देना और संबंधित प्रतिष्ठानों के साथ समन्वय को बेहतर बनाना है।

परमाणु ऊर्जा और हवाई अड्डों के सेक्टर में बदलाव नहीं

पुनर्गठन के दौरान CISF की कुछ मौजूदा कार्यात्मक व्यवस्थाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु में परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग (DAE एवं DoS) से संबंधित सेक्टर अपनी मौजूदा कार्यात्मक व्यवस्था के तहत काम करता रहेगा।

इसी तरह, नई दिल्ली में एयरपोर्ट सेक्टर-I और बेंगलुरु में एयरपोर्ट सेक्टर-II भी अपनी संबंधित व्यवस्थाओं के अनुसार काम जारी रखेंगे।

CISF के पुनर्गठन से सुरक्षा व्यवस्था को क्या फायदा होगा?

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा विचार सुरक्षा प्रबंधन को सामान्य क्षेत्रीय व्यवस्था से आगे बढ़ाकर उद्योग-विशेष की जरूरतों के अनुरूप बनाना है। बिजली संयंत्रों, कोयला खदानों, इस्पात इकाइयों और बंदरगाहों की सुरक्षा चुनौतियां एक-दूसरे से अलग होती हैं। ऐसे में विशेषज्ञता आधारित सेक्टर व्यवस्था से निगरानी और समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

पुनर्गठन के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  1. परिचालन निगरानी में सुधार: महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा गतिविधियों पर अधिक केंद्रित नजर रखना।
  2. क्षेत्र-विशेष की विशेषज्ञता: अलग-अलग उद्योगों की सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के अनुसार विशेषज्ञता विकसित करना।
  3. प्रक्रियाओं में एकरूपता: सुरक्षा मानकों और प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाना।
  4. समन्वय मजबूत करना: संबंधित मंत्रालयों, सरकारी विभागों और प्रतिष्ठान प्रबंधन के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करना।

कुल मिलाकर, 1 नवंबर 2026 से प्रस्तावित CISF पुनर्गठन देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक विशेषज्ञता-आधारित बनाने की दिशा में अहम कदम है। हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक प्रभाव नई व्यवस्था लागू होने के बाद उसके संचालन, समन्वय और निगरानी की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगा।

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