लखनऊ/17 अक्टूबर 2026: लखनऊ में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ी पहल होने जा रही है। वृंदावन योजना के सेक्टर-7 में उत्तर प्रदेश का पहला अत्याधुनिक ई-बस पोर्ट विकसित किया जाएगा। करीब 265 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना में 75 प्लेटफॉर्म बनाए जाने की योजना है, जहां से एक साथ 150 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, चार्जिंग और रखरखाव की व्यवस्था होगी।
इस परियोजना के साथ राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का विस्तार भी किया जाएगा। राज्य सरकार की कार्ययोजना के मुताबिक, एक वर्ष के भीतर उत्तर प्रदेश में कुल 1,725 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जानी हैं। इनमें 300-300 बसें लखनऊ और कानपुर को मिलेंगी, जबकि शेष बसें प्रदेश के दूसरे प्रमुख शहरों में चलाई जाएंगी।
लखनऊ ई-बस पोर्ट: वृंदावन योजना के सेक्टर-7 में होगा निर्माण
प्रस्तावित ई-बस पोर्ट के निर्माण के लिए वृंदावन योजना के सेक्टर-7 स्थित केपी-4 पार्किंग स्थल को चुना गया है। परियोजना की विस्तृत डिजाइन तैयार की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्यदायी संस्था ओमेक्स जमीन के लगभग 45 प्रतिशत हिस्से में ई-बस पोर्ट विकसित करेगी।
कैबिनेट से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद नगरीय परिवहन विभाग के निदेशक महेंद्र बहादुर सिंह की ओर से ओमेक्स को लेटर ऑफ अवार्ड जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। संबंधित एजेंसी अगले महीने से निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी में है।
करीब 265 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यह बहुमंजिला सुविधा इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के साथ उनके रखरखाव और चार्जिंग की जरूरतों को भी पूरा करेगी। इससे बसों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश में खरीदी जाएंगी 1,725 इलेक्ट्रिक बसें
राज्य में प्रदूषण कम करने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 1,725 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की कार्ययोजना तैयार की गई है। योजना के तहत बसों का वितरण इस प्रकार प्रस्तावित है:
- लखनऊ: 300 इलेक्ट्रिक बसें
- कानपुर: 300 इलेक्ट्रिक बसें
- अन्य 15 शहर: कुल 1,125 इलेक्ट्रिक बसें
इस तरह प्रदेश के प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। योजना में स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने पर भी जोर है। दी गई जानकारी के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश के तीन बस निर्माताओं को प्राथमिकता देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
इस कदम से स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र को अवसर मिलने के साथ इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन के विस्तार को गति मिल सकती है। हालांकि, बसों की खरीद, आपूर्ति और विभिन्न शहरों में संचालन की समयसीमा संबंधित प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी।
लखनऊ के 14 मार्गों पर चलेंगी नई इलेक्ट्रिक बसें
राजधानी को मिलने वाली 300 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन दो चरणों में करने की योजना है। पहले चरण में 150 बसें लखनऊ के 14 निर्धारित मार्गों पर उतारी जाएंगी। इन बसों में यात्रियों की जरूरतों के मुताबिक अलग-अलग आकार के वाहन शामिल होंगे।
प्रस्तावित बेड़े का विवरण इस प्रकार है:
| बसों का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| 9 मीटर लंबी बसें | 100 |
| 12 मीटर लंबी बसें | 200 |
| कुल | 300 |
ये बसें वातानुकूलित होंगी। योजना के मुताबिक, इनके संचालन से राजधानी में प्रतिदिन सफर करने वाले लगभग 25 हजार से 30 हजार यात्रियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट के प्रबंध निदेशक की ओर से सभी 14 चिन्हित मार्गों का तकनीकी सर्वे पूरा कर विस्तृत रिपोर्ट नगरीय परिवहन निदेशालय को सौंपे जाने की जानकारी भी दी गई है।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
लखनऊ में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने और वृंदावन योजना में आधुनिक ई-बस पोर्ट विकसित होने से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है।
पहला, बसों की चार्जिंग और रखरखाव के लिए समर्पित सुविधा मिलने से संचालन को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। दूसरा, वातानुकूलित बसों के जरिए यात्रियों को अधिक सुविधाजनक सफर उपलब्ध कराया जा सकेगा। तीसरा, इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाने और स्थानीय स्तर पर वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।
वृंदावन योजना और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी यह परियोजना महत्वपूर्ण हो सकती है, बशर्ते नए बस मार्गों और सेवाओं का नियोजन यात्रियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप किया जाए।
ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दिशा में लखनऊ की बड़ी पहल
उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और लखनऊ में ई-बस पोर्ट का निर्माण सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। यदि निर्धारित समय पर परियोजना पूरी होती है और बसों का संचालन प्रस्तावित मार्गों पर शुरू होता है, तो राजधानी के यात्रियों को परिवहन का एक और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा।
फिलहाल निर्माण शुरू होने, बसों की आपूर्ति और सेवा शुरू होने की तारीखों से जुड़ी आगे की आधिकारिक घोषणाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। परियोजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि चार्जिंग सुविधाएं, रखरखाव और मार्गों पर बसों की उपलब्धता किस तरह सुनिश्चित की जाती है।








